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पेनाइल कैंसर दुर्लभ कैंसर में से एक है, और जिन पुरुषों का सर्कम्सिश़न (खतना) नहीं किया गया हो उन पुरुषों में यह अधिक आम है। इसके अलावा दिर्घकालिक एचपीवी संक्रमण भी पेनाइल कैंसर के लिए एक जोखिम कारक है।
पेनाइल कैंसर तब होता है जब लिंग में मौजूद सेल्स (कोशिकाएं) असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
पेनाइल कैंसर दुर्लभ कैंसर में से एक है, और जिन पुरुषों का सर्कम्सिश़न (खतना) नहीं हुआ है उनमें यह अधिक आम है। इसके अलावा दीर्घकालिक एचपीवी संक्रमण भी पेनाइल कैंसर के लिए एक जोखिम कारक है।
यदि पेनाइल कैंसर का प्रारंभिक चरणों में पता चल जाता है तो इसका सबसे अच्छा इलाज किया जाता है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और तत्काल चिकित्सा के लिए डॉक्टर से परामर्श लें।
जिस प्रकार की सेल्स (कोशिका) से वे उत्पन्न होते हैं, उसके आधार पर पेनाइल कैंसर को निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है :
यह कैंसर का प्रकार स्क्वैमस सेल के रूप में जानी जाने वाली छोटी, चपटी सेल्स (कोशिकाओं) से उत्पन्न होता है। हालांकि यह कहीं भी पाया जा सकता है, यह आमतौर पर चमड़ी पर या उसके नीचे पाया जाता है। यह कैंसर प्रकार लगभग 95% पेनाइल कैंसर का कारण बनता है।
यह कैंसर प्रकार वर्णक बनाने वाली सेल्स (कोशिकाओं) में बनता है, और यह तुलनात्मक रुप से आक्रामक होता है, यानी यह तेजी से फैलता है।
सारकोमा रक्त वाहिकाओं और वसा ऊतकों जैसी संयोजी ऊतकों, मांसपेशियों और उपास्थि में बनता है।
यह कैंसर का प्रकार धीरे-धीरे बढ़ता है, और यह त्वचा की सबसे गहरी परतों में बढ़ने लगता है। बेसल सेल कार्सिनोमा अन्य अंगों में फैलने की संभावना नहीं होती है।
जब पसीने की ग्रंथियों में मौजूद सेल्स (कोशिकाएं) अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं तब एडेनोकार्सिनोमा बनता है । यह भी दुर्लभ पेनाइल कैंसर में से एक है।
पेनाइल कैंसर का शुरुआती चरणों में पता लगाना आसान है क्योंकि लिंग की संरचना और दिखावट में बदलाव पेनाइल कैंसर के पहले लक्षणों में से एक है। पेनाइल कैंसर के अन्य प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं :
ये लक्षण हमेशा पेनाइल कैंसर का संकेत नहीं देते हैं; यह लक्षण किसी प्रकार के संक्रमण के परिणाम स्वरुप भी हो सकते हैं। हालांकि, सुनिश्चित करने के लिए, बिना किसी देरी के डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
पेनाइल कैंसर के सटीक कारण अज्ञात हैं। हालांकि, कुछ जोखिम कारक हैं जो पेनाइल कैंसर होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं। पेनाइल कैंसर से जुड़े महत्वपूर्ण जोखिम कारक निम्नलिखित हैं :
एचपीवी संक्रमण एक यौन-संचारित स्थिति है जिसका तुरंत इलाज किया जाना चाहिए। जिन पुरुषों को दीर्घकालिक एचपीवी संक्रमण होता है उनमें पेनाइल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
जिन पुरुषों का सर्कम्सिश़न (खतना) नहीं हुआ है, उनमें स्मेग्मा नामक एक गाढ़ापन निर्माण होता है और चमड़ी के नीचे तरल पदार्थ जमा हो जाते हैं। स्मेग्मा जलन और सूजन पैदा कर सकता है, और अगर समय पर इसका इलाज नहीं किया जाता है, तो यह पेनाइल कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।
पेनाइल कैंसर 60 साल और उससे अधिक उम्र के पुरुषों में अधिक पाया जाता है।
तम्बाकू में मौजूद कुछ हानिकारक रसायन कई अन्य कैंसर के साथ-साथ पेनाइल कैंसर के गठन को भी ट्रिगर कर सकते हैं।
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को भी पेनाइल कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
फाइमोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें चमड़ी सख्त हो जाती है, और इस वजह से पूरी तरह से सफाई करना मुश्किल हो सकता है। खराब पेनाइल हाइजीन पेनाइल कैंसर के लिए एक जोखिम कारक है।
जिन लोगों ने सोरायसिस के उपचार के लिए पीयूवीए - पुवा थेरेपी (सोरालेन एंड अल्ट्रावायोलेट ए लाईट) प्राप्त की है, उन्हें पेनाइल कैंसर होने का जोखिम अधिक होता है।
यदि पेनाइल कैंसर का जल्दी निदान हो जाता है तो इसका इलाज करना तुलनात्मक रुप से आसान होता है। पेनाइल कैंसर का पता लगाने और निदान करने के लिए डॉक्टर द्वारा विभिन्न परीक्षणों की सिफारिश की जाती है :
जब कोई मरीज खुद में पेनाइल कैंसर के लक्षणों का अनुभव करता है, तो डॉक्टर किसी भी परीक्षण से पहले शारीरिक परीक्षा की सलाह देते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, डॉक्टर रंग और संरचना में बदलाव के साथ घावों, गांठों और किसी भी प्रकार के सूजन की उपस्थिति के लिए अंग की अच्छी तरह से जांच करते है। डॉक्टर मरीज़ के चिकित्सा इतिहास पर भी ध्यान दे सकते है जिसमें मरीज़ की किसी भी प्रकार की महत्वपूर्ण चिकित्सा स्थितियों, पिछले उपचारों, एलर्जी, यदि कोई हो, तो उसके बारे में प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
यदि डॉक्टर को गांठ या कोई अन्य असामान्यताएं दिखाई देती हैं, तो बायोप्सी की सिफारिश की जा सकती है। बायोप्सी के दौरान, संदिग्ध क्षेत्र से ऊतक की एक छोटी मात्रा इकठ्ठा की जा सकती है और कैंसर की उपस्थिति के लिए उस नमूने की जांच की जा सकती है। पेनाइल कैंसर के लिए एक निश्चित निदान प्राप्त करने में बायोप्सी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पेनाइल कैंसर आस-पास के अंगों में फैल गया है या नहीं इसकी जांच करने के लिए, डॉक्टर सिस्टोस्कोपी का सुझाव दे सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, एक लचीली ट्यूब जिसमें प्रकाश स्रोत और वीडियो कैमरा में फिट किया जाता है, उसे मूत्राशय के माध्यम से पेनिस (लिंग) में डाला जाता है। सिस्टोस्कोपी के माध्यम से, डॉक्टर कैंसर के संकेतों के लिए लिंग के विभिन्न क्षेत्रों की जांच करते है।
पेनाइल कैंसर अन्य अंगों में फैल गया है या नहीं इसकी जांच करने के लिए एमआरआई स्कैन, पेट सीटी स्कैन इत्यादि जैसे इमेजिंग परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है। इन परीक्षणों का उपयोग रोग के चरण का निर्धारण करने, उपचार योजना बनाने, उपचार की निगरानी करने और रोग के रिलैप्स (पुनरावर्तन) का पता लगाने के लिए भी किया जाता है।
लिम्फ नोड डिसेक्शन (विच्छेदन) ट्यूमर के करीब मौजूद लिम्फ नोड्स को निकालने के लिए की जाने वाली एक सर्जिकल प्रक्रिया है। बाद में कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति के लिए इन लिम्फ नोड्स की जांच की जाती है। क्या कैंसर अन्य अंगों में फैलना शुरू हो गया है या नहीं यह निर्धारित करने में यह प्रक्रिया डॉक्टरों की मदद करती है।
पेनाइल कैंसर के प्रबंधन के लिए कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। उपचार योजना तैयार करने से पहले कई कारकों, जैसे कि रोग का चरण, ट्यूमर का सटीक स्थान, इसका ग्रेड, मरीज़ की उम्र, मरीज़ की कुल स्वास्थ्य स्थिति आदि पर विचार किया जाता है।
आमतौर पर, पेनाइल कैंसर के उपचार की योजना में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) और कीमोथेरेपी शामिल हैं।
पेनाइल कैंसर प्रबंधन के लिए सिफारिश कि जाने वाली उपचार की मुख्य पंक्ति सर्जरी है। सर्जरी का उद्देश्य कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को निकालना और जितना भी संभव हो कैंसर प्रभावित अंग की संरचना और कार्य को संरक्षित करना है। पेनाइल कैंसर के प्रबंधन के लिए कई सर्जिकल प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं, और स्थिति की गंभीरता के आधार पर उनमें से एक की सिफारिश की जा सकती है
इस प्रक्रिया में कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को जमाने और उन्हें नष्ट करने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन का उपयोग किया जाता है। पेनिस के सतही ट्यूमर के लिए क्रायोसर्जरी की सिफारिश की जा सकती है।
लेज़र सर्जरी एक अन्य उपचार विकल्प है, जो शुरुआती चरण के पेनाइल कैंसर के लिए सुझाया जाता है। यह ट्यूमर सेल्स (कोशिकाओं) को मारने के लिए इन्टेन्स लाईट बीम (प्रकाश की एक तीव्र किरण) का उपयोग करता है।
जिन मामलों में पेनाइल कैंसर पेनिस की चमड़ी से आगे नहीं फैला हो उन मामलों में सर्कम्सिश़न (खतना) की सिफारिश की जाती है । इस प्रक्रिया में पेनिस की त्वचा की थोड़ी मात्रा में चमड़ी को पूरी तरह हटा दिया जाता है।
एक्सिश़न (छांटने) की प्रक्रिया में ट्यूमर को स्वस्थ ऊतकों की छोटी मात्रा के साथ निकालना शामिल होता है। स्थिति की गंभीरता के आधार पर, सर्जन स्वस्थ ऊतक की एक छोटी मात्रा (साधारण एक्सिश़न (छांटना)) या बड़ी मात्रा में स्वस्थ ऊतक (विस्तृत स्थानीय एक्सिश़न (छांटना)) निकाल सकते है। यदि ऑपरेशन किए गए क्षेत्र को कवर करने के लिए पर्याप्त त्वचा बची ना हो, तो शरीर के किसी अन्य भाग से त्वचा का कुछ हिस्सा निकाल कर उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रारंभिक चरण के पेनाइल कैंसर जो पेनिस की नोक (ग्लैन्ज़) तक सीमित होते हैं, उनमें पूरे ग्लैन्ज़ या उनके कुछ हिस्से को निकाला जा सकता है। इस प्रक्रिया के बाद रीकन्स्ट्रक्टिव (पुनर्निर्माण) सर्जरी की जा सकती है।
मोह्स सर्जरी के दौरान, सर्जन पेनिस की त्वचा की एक पतली परत को निकाल देते है और कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति के लिए तुरंत माइक्रोस्कोप के नीचे इसकी जांच करते है। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक जांच किए गए नमूने कैंसर-मुक्त नहीं हो जाते।
पेनेक्टोमी में पूरे लिंग या लिंग के कुछ हिस्से को निकालना शामिल होता है। पार्शल पेनेक्टोमी के दौरान, डॉक्टर जितना संभव हो उतना शाफ्ट को संरक्षित करने का प्रयास कर सकते हैं। टोटल पेनेक्टोमी के दौरान, पूरे लिंग को निकाल दिया जाता है। टोटल पेनेक्टॉमी के बाद पेरिनेल्यूरेथ्रोस्टोमी की जा सकती है, जिसमें सर्जन मूत्र को शरीर से बाहर निकालने के लिए पेरिनेम जो स्क्रोटम (अंडकोश) और एनस (गुदा) के बीच की जगह होती है उसमें एक नया चीरा लगाते है। क्योंकि मूत्रमार्ग में स्फिंक्टर मांसपेशी (पेशी जो मूत्र प्रवाह को नियंत्रित करती है) को बरकरार रखा जाता है, इससे सर्जरी के बाद भी मरीज़ का मूत्राशय पर नियंत्रण रहेगा। पेनेक्टॉमी और पेरिनेल्यूरेथ्रोस्टोमी के बाद फालो अप (अनुवर्ती) देखभाल के बारे में अधिक जानकारी के लिए, मरीज़ों और उनके देखभाल करने वाले लोगों को अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
इस प्रक्रिया में जो लिम्फ नोड्स ट्यूमर के करीब होते हैं, उन लिम्फ नोड्स को निकालना शामिल होता है ताकि कैंसर फैलना शुरू हुआ है या नहीं इसकी जांच कि जा सके ।
पेनाइल कैंसर के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) में हाई – एनर्जी रेडिएशन बीम (उच्च-ऊर्जा विकिरण किरणों ) का उपयोग करके कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करना शामिल है, जो या तो एक्स-रे या प्रोटॉन बीम हो सकते हैं। उपचार प्रतिक्रिया को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) को अन्य उपचार विकल्पों, अर्थात् सर्जरी और कीमोथेरेपी के साथ संयोजित किया जा सकता है। रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) को बाहरी या आंतरिक रूप से प्रशासित किया जा सकता है। रोग के कारण होने वाले लक्षणों को कम करने के लिए भी इस उपचार की सिफारिश की जा सकती है।
कीमोथेरेपी एक सिस्टमिक थेरेपी (प्रणालीगत चिकित्सा) है जो प्रभावशाली कैंसर रोधी दवाओं का उपयोग करके कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट कर देती है। ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए सर्जरी (नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी) से पहले कीमोथेरेपी दी जा सकती है और / या बची हुई कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने और दोबारा होने के जोखिम को कम करने के लिए सर्जरी के बाद (एडजुवेंट) कीमोथेरेपी दी जा सकती है। कीमोथेरेपी को मौखिक रूप से, नसों के माध्यम से या स्थानिय रूप से प्रशासित किया जा सकता है। आमतौर पर प्रारंभिक चरण के पेनाइल कैंसर के लिए टोपिकल (स्थानिक) कीमोथेरेपी की सिफारीश की जाती है।
हां, पेनाइल कैंसर का इलाज संभव है। कई मामलों में, इसका सकारात्मक नैदानिक परिणामों और उत्कृष्ट उत्तरजीविता दर के साथ इलाज किया जा सकता है, और मरीज़ बिना किसी आपत्ति के अपने सामान्य जीवन में वापस जा सकते हैं।
फिर भी, पेनाइल कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज करने के लिए, प्रारंभिक अवस्था में ही उनका पता लगाना होगा। संरचना, बनावट या सूजन में किसी भी बदलाव को नज़रअंदाज़ नहीं करना महत्वपूर्ण है, और यदि इनमें से कोई भी लक्षण देखा जाता है, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
पेनाइल कैंसर के लिए कोई मानक जांच प्रक्रिया उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, शुरुआती पहचान अभी भी संभव हो सकती है।
हर व्यक्ती को त्वचा में किसी भी तरह का बदलाव जैसे कि रंग, संरचना, असामान्य वृद्धि, फफोले या घाव जैसे लक्षणों पर नियमित रूप से नजर रखनी चाहिए। आमतौर पर कई लोग इस प्रकार की असामान्यताएं जो वे देखते हैं उन्हें रिपोर्ट करने में असहज महसूस करते हैं । हालाँकि, ऐसा नहीं करना चाहिए। कुछ भी असामान्य होने पर तुरंत डॉक्टर को सूचित किया जाना चाहिए, क्योंकि यह प्रारंभिक अवस्था में पेनाइल कैंसर को पकड़ने के सबसे आसान तरीकों में से एक है।
दुर्भाग्य से, कुछ मामलों में पेनाइल कैंसर वापस आ सकता है। हालांकि, अगर इसका निदान जल्दी किया जाए तो उसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। पुनरावर्तन को जल्दी पकड़ने के लिए, मरीज़ों को अपनी फालो अप अपॉइंटमेंट (अनुवर्ती नियुक्तियों) को जारी रखना चाहिए जो उपचार के बाद नियमित अंतराल पर निर्धारित की जाएंगी।
पेनाइल कैंसर को पूरी तरह से रोकने के लिए कोई ज्ञात तरीके उपलब्ध नहीं हैं। हालाँकि, आप कुछ उपायों का पालन कर सकते हैं जो आपके पेनाइल कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं :
सुरक्षित यौन संबंधों की आदतो का पालन करें और एक से अधिक यौन साथी रखने से बचें। यह आपके एचपीवी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद करता है और इस तरह पेनाइल कैंसर के खतरे को कम करता है।
अपने प्यूबिक (जघन) क्षेत्र को हमेशा साफ रखें और यदि आपका सर्कम्सिश़न (खतना) नहीं हुआ है, तो चमड़ी के नीचे के क्षेत्र को साफ रखना सुनिश्चित करें ।
यदि आप धूम्रपान नहीं करते हैं, तो कभी भी धूम्रपान करना शुरू न करें और यदि करते हैं, तो इसे छोड़ दें। धूम्रपान विभिन्न प्रकार के कैंसर का कारण बनता है, और आप तंबाकू के सेवन से परहेज करके उनके जोखिम को कम कर सकते हैं।